|| गुन स्वभाव त्यागे बिन दुर्लभ परमानंद ||

SHRI SWAMI SACHCHIDANDN JI DHARMIK EVM PARAMARTHIK

NYAAS DHAARKUNDI DISTRICT SATNA(M.P.) REG.01B113/ 2010-11 PIN-485226

About Swami Ji


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Shri Shri Shri 1008 Shri Swami Sachchidanand ji maharaj ji

स्वामी जी श्री श्री 1008 श्री परमहंस जी महाराज जी के द्वारा गुरु आज्ञा प्राप्त कर उनकी आज्ञा के अनुसार धारकुंडी के वन मे अपनी साधना हेतु पहुच कर अपनी साधना को सफल बनाया है।स्वामी जी का आगमन सन 22 नवम्बर 1956 मे अगहन कृष्ण पक्ष चतुर्थी मे हुआ स्वामी जी इस घनघोर जंगल मे जहां दूर दूर तक कोई भी आने जाने से घबराता था ऐसी जगह मे स्वामी जी ने अपनी साधना तपस्या की है । आज स्वामी जी के आनेको भक्तों द्वारा उनका अवतरण दिवस 01 जनवरी को मनाया जाता है और गुरुपूर्णिमा के दिन त्रिशूल पूजा कर के अपने गुरु के चरणों मे अपनी भक्ति को समर्पित कर प्रत्येक भक्त आते हैं और बड़े हर्षो उल्लास के साथ प्रत्येक त्योहारों मे सम्मिलित होते है स्वामी जी कहते है "गुण स्वभाव त्यागे बिन दुर्लभ परमानन्द" स्वामी जी जब यहाँ तपस्या करने के लिए आए थे तब उस गुफा मे शेर था जो की स्वामी जी को देख के वापस जंगल की ओर चला जाता था धीरे धीरे लोगो का आगमन होने लगा स्वामी जी के प्रति लोगो की आस्था बढ्ने लगी और स्वामी जी के दर्शन हेतु लोग दूर दूर से आने लगे ।

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